पिटारा भानुमती का

April 23, 2006

दो शब्द

Filed under: अश्रेणीबद्ध — अमित @ 12:47 am

अंग्रेजी में अपना चिट्ठा लिखते-लिखते थक गया था. भई, अब बात तो सीधी-साधी है, जब अंग्रेजी में सोचता ही नहीं तो काहे उस बेचारी की टांग तोडूं. खैर, अब देवनागरी लिखने की विद्या का पता लग गया है और समस्या सुलझ गयी है तो देर कैसी? जल्दी ही कुछ सार्थक लिखने का प्रयास करूँगा. और हाँ, विशेष प्रोत्साहन के लिये पुराने और धुरंधर चिट्ठाकार मिश्रा जी को धन्यवाद.

6 Comments »

  1. वत्स अमित,
    तुम्हारे हिन्दी ब्लॉग लिखने पर नारद बहुत प्रसन्न हुए। हिन्दी ब्लॉग जगत मे तुम्हारा हार्दिक स्वागत है। तुम्हारे फीड को नारद मे जोड़ दिया गया है।

    Comment by नारद मुनि — April 23, 2006 @ 4:53 am

  2. स्वागत है भाई अमित

    Comment by Pankaj Bengani — April 23, 2006 @ 8:16 am

  3. बडी उत्सुकता है,
    पिटारे की एक से बढकर एक रहस्यमयी, मनोरन्जक एवं ग्ञानवर्धक posts देखने का।
    नोट:धन्यवाद के लिये “Grazie Mille”,
    वैसे मै पुराना नही हूं,
    वाकयी धुरन्धर कौन कौन महोदय हैं,इसका पता जल्दी ही चलेगा:मतदान शुरू हो चुका है।

    Comment by राम चन्द्र मिश्र — April 23, 2006 @ 9:27 am

  4. स्वागत है आपका !

    Comment by अनूप शुक्ला — April 23, 2006 @ 6:08 pm

  5. नारद जी, आपका आशीर्वाद मिला और मैं धन्य हुआ. अपनी कृपा बनाये रखियेगा.

    पंकज भाई, मिश्रा जी, अनूप भाई इस चौपाल में नया हूं, इसीलिये सारी गलतियां सुधारने का जिम्मा रहा आप लोगों का. अब बातें तो होती ही रहेंगी.

    Comment by khulepanne — April 23, 2006 @ 10:29 pm

  6. एक ओर अमित, स्‍वागत है बंधुवर

    Comment by Readers-cafe — April 24, 2006 @ 2:49 am


RSS feed for comments on this post. TrackBack URI

Leave a comment

Blog at WordPress.com.