पिटारा भानुमती का

January 8, 2007

एक पेड़

Filed under: अश्रेणीबद्ध — अमित @ 12:00 am

एक खूबसूरत सा पेड़ जिसके दिन की शुरुआत किसी कोयल के मधुर गीत से नहीं होती, बल्कि यह तो हमेशा सहमा-सहमा रहता है. गाज़ा पट्टी के इलाके में खड़ा है यह!

पता नहीं कब बारूद के ढेर इसको राख कर दें! बस आसमान में बाँहें फैलाये दुआ ही माँग सकता है - अपने लिये, उन मासूमों के लिये जो स्कूल से लौटते वक्त इसकी छाँह में खेला करते थे कभी, और उनके लिये जिनसे इसकी कोई रंजिश तो नहीं पर फिर भी इसकी जान के दुश्मन बने हैं.

यह चित्र मैंने एट्रियम चित्र प्रदर्शनी (दिसम्बर २००६) में अपने कैमरे में उतारा था. चित्र लेने की अनुमति देने के लिये आयोजकों का धन्यवाद.

5 Comments »

  1. चित्र सुंदर है और विवरण भी. पीछे काफी बड़ी बस्ती दिखती है.

    Comment by समीर लाल — January 8, 2007 @ 1:36 am

  2. सुंदर विवरण। सही कहा, आपने इस्लामी आतंकवादियों ने इस जमीन को दोजख बना दिया है।

    Comment by Shrish — January 8, 2007 @ 4:18 am

  3. खूबसूरत!

    Comment by अनूप शुक्ला — January 8, 2007 @ 4:19 am

  4. khubsurati kyaa hai ye to nahi jaan paayaa is chitra me par peeche kee bastee kee chintaa jyadah honi thi.

    Comment by ravindra — January 8, 2007 @ 5:52 am

  5. आप सब का टिप्पणियों के लिये धन्यवाद.

    भाई श्रीश, आतंक मचाने वालों का कोई मजहब नहीं होता. और इनमें से अधिकांश तो किसी की कठपुतली मात्र होते हैं जिनकी डोर किसी देश की सरकार के हाथ में भी हो सकती है और भूमिगत हुये किसी कायर के पास भी.

    रवीन्द्र भाई, हम सबको भी पीछे वाली बस्ती की चिंता है, बस बात कहने के लिये पेड़ एक संकेत मात्र था, या कहिये कि बस्ती का ही एक प्रतिनिधि था.

    Comment by अमित — January 8, 2007 @ 10:57 pm

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