पिटारा भानुमती का

March 4, 2007

जीवन के रंग

Filed under: अश्रेणीबद्ध — अमित @ 9:21 pm

होली बीत गयी. आशा है होली ने सबके जीवन में नया रंग भरा होगा. पर उनका क्या जो रंगों को सिर्फ़ छू सकते हैं देख नहीं सकते? उनके जीवन में रंग कौन भरेगा? शायद मैं और आप!

एक अच्छा संदेश इतने बेहतरीन ढंग से देने के लिये कोड रेड फ़िल्म्स को बधाई.

Blog at WordPress.com.