अभी काम के सिलसिले में प्रयाग जाना हुआ. सौभाग्य से मैं गंगा के पास ही ठहरा था. गंगा में सूरज को डूबते देखना विलक्षण अनुभव रहा; मानो थका-हारा सूरज किसी घाट पर हाथ-मुँह धोने आया हो.

आप भी देखिये यह नज़ारा.
अभी काम के सिलसिले में प्रयाग जाना हुआ. सौभाग्य से मैं गंगा के पास ही ठहरा था. गंगा में सूरज को डूबते देखना विलक्षण अनुभव रहा; मानो थका-हारा सूरज किसी घाट पर हाथ-मुँह धोने आया हो.

आप भी देखिये यह नज़ारा.
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बहुत बेहतरीन और मनोरम नजारा है.
Comment by समीर लाल — April 23, 2007 @ 6:08 pm
अद्भुत है
मैं तो प्रयाग के घाटों के किनारे ही बड़ा हुआ हूं। दारागंज में ही घर है।
वैसे आपके फोटो में सूरज ऐसे है कि थक गंगा के शीतल जल में पांव डालकर बैठ गया हो और निकलने की इच्छा ही न हो। लेकिन, थके लोगों की ही तरह सुबह ये भी निकलकर काम पर चल पड़ेगा।
Comment by हर्षवर्धन — April 23, 2007 @ 6:55 pm
बहुत ही सुन्दर
प्रयाग आये और बताया भी नही अगली बार आइयेगा तो जरूर बताइयेगा।
Comment by PRAMENDRA PRATAP SINGH — April 23, 2007 @ 7:09 pm
बहुत अच्छा लग रहा है..सूरज
Comment by RC Mishra — April 23, 2007 @ 9:21 pm
सुन्दर
Comment by उन्मुक्त — April 24, 2007 @ 3:38 am
बहुत अच्छा द्श्य!
Comment by अनूप शुक्ला — April 24, 2007 @ 3:45 am
लगता है आपने चित्र खींचने में थोड़ी देर कर दी, कुछ मिनट पहले लेते तो कालिमा कम दिखती।
Comment by हरिराम — April 24, 2007 @ 8:38 am
आप सब का टिपपणियों के लिये धन्यवाद.
हर्षवर्धन जी, आपने सूर्यास्त के समय सूर्य की अति सुन्दर उपमा दी है, प्रसन्नता हुई.
प्रमेन्द्र भाई, कार्यक्रम व्यस्त रहा और आपसे भेंट न हो सकी इसीलिये आपसे क्षमा चाहते हैं. अगली बार अवश्य आपके सम्मुख उपस्थित होंगे.
हरिराम जी, समस्या यह थी कि थोड़ी देर पहले कैमरा चला देते तो सूरज इतना ऊपर था कि आता ही नहीं. वैसे आपकी सलाह आगे से ध्यान रखी जायेगी.
Comment by अमित — April 24, 2007 @ 11:14 am
waah ! ati sundar
Comment by मनीष — May 1, 2007 @ 7:15 pm
बहुत ही सुन्दर ! मैने तो फ़ौरन ही इसे desktop background मे डाल दिया.
Comment by DR PRABHAT TANDON — June 1, 2007 @ 8:38 pm
बहुत सुंदर!
Comment by सिंधु श्रीधरन — June 23, 2007 @ 8:34 am
duniya ki sab se khubshurat dharati jaha bhagawan bhi niwas karte hain kumbh mahine me lag ta aap kahi swarg me ho
Comment by arun mishra — July 3, 2008 @ 9:18 am