पिटारा भानुमती का

अक्टूबर 15, 2006

अगले जनम मोहे बिटिया न कीजो

Filed under: अश्रेणीबद्ध — अमित @ 11:56 पूर्वाह्न

इंटरनेट पर टहलते-टहलते एक दिल दहला देने वाला समाचार मिला. आपको याद होगा आज से करीब दो साल पहले भारत में धनंजय चटर्जी को फ़ाँसी दी गयी थी. करीब-करीब उसी समय ईरान में एक १६ वर्षीय लड़की अतफ़ा सहाले को फ़ाँसी देने की तैयारियां चल रहीं थीं, वह भी सार्वजनिक स्थान पर क्रेन से लटकाकर! और यह सब आधिकारिक रूप से. उसका अपराध – ईरान के इस्लामिक कानून को चुनौती देते हुए किसी पुरुष से संबंध रखकर अपवित्र कार्य करना और दो बार उसके फ़ैसले की सुनवाई कर रहे धार्मिक जज के विरोध में अदालत में अपना बुरका उतार फेंकना. और हाँ, जिस पुरुष ने उसको अपने साथ इन संबंधों पर मजबूर किया उसको भी सज़ा सुनायी गयी -९५ कोड़े की! वह आखिर पुरुष जो था.

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बचपन से ही अतफ़ा को इस्लामी तौर तरीके रास नहीं आये. उसको जीन्स पहनकर डांस करना भाता था, तो उसके मित्र उसको माधुरी (दीक्षित) कहते थे. उसे गैर-इस्लामिक पोशाक में अपने मित्रों के साथ रेस्तरां जाना और घूमना पसंद था. इस प्रकार वह आस-पास की सादी वेश-भूषा में सड़कों पर टहलते रहने वाली नैतिक पुलिस की नज़र में आ गयी, जिसका काम यह सुनिश्चित करना है कि सब कुछ इस्लामी कानून के हिसाब से चले. सब कुछ कानून के हिसाब से चले इसीलिये तो अदालत मे उसकी उम्र १६ की जगह २२ वर्ष लिखी गयी जिससे कि उसको वयस्क घोषित कर सज़ा देने में कोई मुश्किल न आये. इस धोखाधड़ी से अतफ़ा के घरवाले उसके फ़ाँसी हो जाने तक अनभिज्ञ रहे.

फ़ाँसी की सज़ा ईरान में आम बात है. विश्व में चीन के बाद ईरान ऐसा देश है जहाँ सबसे अधिक संख्या में लोगों को फ़ाँसी दी जाती है. एमनेस्टी इंटरनेशनल के आंकड़ों के अनुसार गत वर्ष चीन में यह संख्या १७७० थी और ईरान में ९४. जब फ़ाँसियां इतनी अधिक दी जायें तो निश्चित ही बहुत से लोग ऐसे भी होते होंगें जिन्हें अपने देश के तंत्र का शिकार होना पड़ता होगा. आज भी ईरान में कई ऐसी स्त्रियां हैं जिन पर इस्लाम विरोधी आचरण के मुकदमे अदालतों में पड़े हैं और वे न्याय की प्रतीक्षा कर रही हैं. पता नहीं इनमें और कितनी अतफ़ा हों?

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