पिटारा भानुमती का

अक्टूबर 15, 2006

अगले जनम मोहे बिटिया न कीजो

Filed under: अश्रेणीबद्ध — अमित @ 11:56 पूर्वाह्न

इंटरनेट पर टहलते-टहलते एक दिल दहला देने वाला समाचार मिला. आपको याद होगा आज से करीब दो साल पहले भारत में धनंजय चटर्जी को फ़ाँसी दी गयी थी. करीब-करीब उसी समय ईरान में एक १६ वर्षीय लड़की अतफ़ा सहाले को फ़ाँसी देने की तैयारियां चल रहीं थीं, वह भी सार्वजनिक स्थान पर क्रेन से लटकाकर! और यह सब आधिकारिक रूप से. उसका अपराध – ईरान के इस्लामिक कानून को चुनौती देते हुए किसी पुरुष से संबंध रखकर अपवित्र कार्य करना और दो बार उसके फ़ैसले की सुनवाई कर रहे धार्मिक जज के विरोध में अदालत में अपना बुरका उतार फेंकना. और हाँ, जिस पुरुष ने उसको अपने साथ इन संबंधों पर मजबूर किया उसको भी सज़ा सुनायी गयी -९५ कोड़े की! वह आखिर पुरुष जो था.

[YouTube=http://www.youtube.com/watch?v=tHqnSe3EqpA]

बचपन से ही अतफ़ा को इस्लामी तौर तरीके रास नहीं आये. उसको जीन्स पहनकर डांस करना भाता था, तो उसके मित्र उसको माधुरी (दीक्षित) कहते थे. उसे गैर-इस्लामिक पोशाक में अपने मित्रों के साथ रेस्तरां जाना और घूमना पसंद था. इस प्रकार वह आस-पास की सादी वेश-भूषा में सड़कों पर टहलते रहने वाली नैतिक पुलिस की नज़र में आ गयी, जिसका काम यह सुनिश्चित करना है कि सब कुछ इस्लामी कानून के हिसाब से चले. सब कुछ कानून के हिसाब से चले इसीलिये तो अदालत मे उसकी उम्र १६ की जगह २२ वर्ष लिखी गयी जिससे कि उसको वयस्क घोषित कर सज़ा देने में कोई मुश्किल न आये. इस धोखाधड़ी से अतफ़ा के घरवाले उसके फ़ाँसी हो जाने तक अनभिज्ञ रहे.

फ़ाँसी की सज़ा ईरान में आम बात है. विश्व में चीन के बाद ईरान ऐसा देश है जहाँ सबसे अधिक संख्या में लोगों को फ़ाँसी दी जाती है. एमनेस्टी इंटरनेशनल के आंकड़ों के अनुसार गत वर्ष चीन में यह संख्या १७७० थी और ईरान में ९४. जब फ़ाँसियां इतनी अधिक दी जायें तो निश्चित ही बहुत से लोग ऐसे भी होते होंगें जिन्हें अपने देश के तंत्र का शिकार होना पड़ता होगा. आज भी ईरान में कई ऐसी स्त्रियां हैं जिन पर इस्लाम विरोधी आचरण के मुकदमे अदालतों में पड़े हैं और वे न्याय की प्रतीक्षा कर रही हैं. पता नहीं इनमें और कितनी अतफ़ा हों?

4 टिप्पणियाँ »

  1. aap ne thik keha.jane kitni atfa hongi,aur kuch tho thik issi samay bus intejar he kerti hongi… jane kisi gahri andheri si jageh pe pari hongi aur sochti hongi ki ab tho jindgi jati hai,yu he.bus dekhna sesh reh gaya hai ush pal tak sab kuch u he hote huye.aur manushya ek kadam piche chalta dikhta hoga ushe aur wo sochti hogi shayed kabhi agey bhi badhega,aur janega ish sunder dhara ko jisne ushe itne jatan se pala hai ki kuch rachega wo bhi ,vivek diya hai isi ki khatir tho ushe, per nahi abhi ushe agey badhne ki utni lalk nahi jitna use apne ahankar ko aur apne paurush ko sinchne me tripti milti hai.. so stri tho usika sadhan matra hai,uski tripti ka ush jhutthi tripti ka jiska ehsas hone me abhi bhi der hai..jane kitni der hai aur kab tak mudh bana rahega aur atfa bus ye soch ke chali jati hongi ki agle janam mughe bitiya na kijiyo.

    टिप्पणी द्वारा mitra — अक्टूबर 17, 2006 @ 8:40 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  2. बर्बरता की हद है. इस्लामी मुल्क़ यूं भी स्त्रियों को आज़ादी नहीं दे सकते. ये उनमें बुनियादी खोट है. ये असलियत देखकर ग़ुस्सा आता है और मन सवाल करता है कि लानत है हम पर जो इक्कीसवीं सदी में आधुनिक होने का दावा करते हैं लेकिन दुनिया का अधिकांश हिस्सा अभी भी जहालत से भरा हुआ है. अमित जी को साधुवाद जो इस ख़बर से मेरा परिचय कराया.

    टिप्पणी द्वारा नीरज दीवान — नवम्बर 10, 2006 @ 7:28 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  3. Amit ji kya kahoon. Auron pe ungli uthaane se pahle apne ghar main bhi jhaank le hum to behtar rahega.. Kucch din pahle khabar uthee thee ki hindustaan main do dalit striyon ko gaon bhar main nagn kar unke saath duraachaar kiya gaya. Is harkat main na sirf gaon ke ucch jaati ke neta balki dalit samaaj ke pradhaan bhi shaamil the. Theek yaad nahin padta parantu shayad un striyon ko tatpaschaat jala bhi daala gaya thaa.

    Haye re aadhunik hindustaani samaaj or hum bhagode jo padh likh desh chodh ke nikal jaate hain. Sharam se apni aatma main jhaankne tak se inkaar kar deta hoon main.

    Nikhil

    टिप्पणी द्वारा Nikhil — दिसम्बर 14, 2006 @ 6:58 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  4. Best link for best site video and music …

    sisters
    virtual isolation

    टिप्पणी द्वारा sdfsdfff — जून 13, 2007 @ 2:23 पूर्वाह्न | प्रतिक्रिया


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