पिटारा भानुमती का

जनवरी 5, 2007

दो नैना एक कहानी

Filed under: अश्रेणीबद्ध — अमित @ 12:53 पूर्वाह्न

उत्तरी इटली का एक शहर ट्यूरिन. घूमते-घूमते एक चौक पर गया तो पाया कि खुले आकाश के नीचे खडी़ कई तस्वीरें मुझे अपने पास बुला रही हैं. अधिकांश तस्वीरें एशियाई और अफ़्रीकी देशों में ली गयीं थीं और उनमें चेहरे के कई भावों को उकेरने का प्रयास किया गया था. नीचे वाली तस्वीर है मुंबई में दो वक्त की रोटी की तलाश करती दो मासूम आँखों की.

do_naina.jpg

मुझे एक बात समझ नहीं आयी – यूरोपीय छायाचित्रकारों को कला की तलाश में गरीब देशों में क्यों आना पड़ा? क्या पेरिस की गलियों या न्यूयार्क की बहुमंजिला इमारतों में मानवीय चेहरों पर भावों का अभाव है? बिना पैसे दिये मॉडल, और वह भी स्वाभाविक, भला गरीब देशों में ही मिल सकते हैं (इसीलिये तो वे देश गरीब हैं!). अब है किसी की हिम्मत जो किसी यूरोपीय शहर में भीख माँगते किसी व्यक्ति की तस्वीर खींच सके बिना पैसे दिये!

8 टिप्पणियाँ »

  1. भाई, ये तो वो ही बेचते और बनाते हैं, जो बिकता है. सही गलत का आंकलन व्यापार में कब हुआ है? 🙂

    टिप्पणी द्वारा समीर लाल — जनवरी 5, 2007 @ 3:51 पूर्वाह्न | प्रतिक्रिया

  2. बहुत दिन बाद दिखे मगर मौके से दिखे.🙂

    टिप्पणी द्वारा समीर लाल — जनवरी 5, 2007 @ 3:52 पूर्वाह्न | प्रतिक्रिया

  3. बहुत दिन बाद दिखे मगर मौके से दिखे.🙂 चिट्ठाकारों की बाकी हलवल पर भी नजर डाली जाये.😉

    टिप्पणी द्वारा समीर — जनवरी 5, 2007 @ 3:53 पूर्वाह्न | प्रतिक्रिया

  4. ऐसी तस्वीरों के प्रदर्शन से एक आत्मसंतुष्टी भी मिलती होगी की वे ऐसे गरीब नहीं.

    टिप्पणी द्वारा संजय बेंगाणी — जनवरी 5, 2007 @ 5:56 पूर्वाह्न | प्रतिक्रिया

  5. वहां ऐसा दैन्य कहां मिलेगा! पन्ने बहुत दिन बाद खुले!

    टिप्पणी द्वारा अनूप शुक्ला — जनवरी 6, 2007 @ 5:56 पूर्वाह्न | प्रतिक्रिया

  6. आप सभी का टि‍प्पणियों के लिये धन्यवाद. समीर जी, अनूप जी और संजय भाई, आपकी बातें एकदम सही हैं. माल बेचने और आत्म संतुष्टि के लिये कोई इतना कुछ करे और अपने को कहे “सिविलाज़्ड”! विरोधाभास सा लगता है.

    टिप्पणी द्वारा अमित — जनवरी 8, 2007 @ 12:07 पूर्वाह्न | प्रतिक्रिया

  7. Fir ek baar hindustaan khojte khojte main amit ji ke pannon main fansta chala gaya. Ye hai humhare India Shining ki asal tasweer. Kaafi maynon main ye hindustaan ki asliyat hai amit ji. Aapko dikha ek bhikhari bheekh mangte hue aur mujhe dikha Europe/US ke aage haath failaye khada ek gareeb Hindustaan.

    टिप्पणी द्वारा Nikhil — जनवरी 13, 2007 @ 6:03 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  8. aap ne 100 taka sahi kaha…..

    टिप्पणी द्वारा ashish — जून 19, 2010 @ 7:14 पूर्वाह्न | प्रतिक्रिया


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