पिटारा भानुमती का

अप्रैल 23, 2007

प्रयाग में सूर्यास्त

Filed under: अश्रेणीबद्ध — अमित @ 4:48 अपराह्न

अभी काम के सिलसिले में प्रयाग जाना हुआ. सौभाग्य से मैं गंगा के पास ही ठहरा था. गंगा में सूरज को डूबते देखना विलक्षण अनुभव रहा; मानो थका-हारा सूरज किसी घाट पर हाथ-मुँह धोने आया हो.

dsc02887-1.jpg

आप भी देखिये यह नज़ारा.

12 टिप्पणियाँ »

  1. बहुत बेहतरीन और मनोरम नजारा है.

    टिप्पणी द्वारा समीर लाल — अप्रैल 23, 2007 @ 6:08 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  2. अद्भुत है
    मैं तो प्रयाग के घाटों के किनारे ही बड़ा हुआ हूं। दारागंज में ही घर है।
    वैसे आपके फोटो में सूरज ऐसे है कि थक गंगा के शीतल जल में पांव डालकर बैठ गया हो और निकलने की इच्छा ही न हो। लेकिन, थके लोगों की ही तरह सुबह ये भी निकलकर काम पर चल पड़ेगा।

    टिप्पणी द्वारा हर्षवर्धन — अप्रैल 23, 2007 @ 6:55 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  3. बहुत ही सुन्‍दर

    प्रयाग आये और बताया भी नही अगली बार आइयेगा तो जरूर बताइयेगा।

    टिप्पणी द्वारा PRAMENDRA PRATAP SINGH — अप्रैल 23, 2007 @ 7:09 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  4. बहुत अच्छा लग रहा है..सूरज

    टिप्पणी द्वारा RC Mishra — अप्रैल 23, 2007 @ 9:21 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  5. सुन्दर

    टिप्पणी द्वारा उन्मुक्त — अप्रैल 24, 2007 @ 3:38 पूर्वाह्न | प्रतिक्रिया

  6. बहुत अच्छा द्श्य!

    टिप्पणी द्वारा अनूप शुक्ला — अप्रैल 24, 2007 @ 3:45 पूर्वाह्न | प्रतिक्रिया

  7. लगता है आपने चित्र खींचने में थोड़ी देर कर दी, कुछ मिनट पहले लेते तो कालिमा कम दिखती।

    टिप्पणी द्वारा हरिराम — अप्रैल 24, 2007 @ 8:38 पूर्वाह्न | प्रतिक्रिया

  8. आप सब का टिपपणियों के लिये धन्यवाद.

    हर्षवर्धन जी, आपने सूर्यास्त के समय सूर्य की अति सुन्दर उपमा दी है, प्रसन्नता हुई.

    प्रमेन्द्र भाई, कार्यक्रम व्यस्त रहा और आपसे भेंट न हो सकी इसीलिये आपसे क्षमा चाहते हैं. अगली बार अवश्य आपके सम्मुख उपस्थित होंगे.

    हरिराम जी, समस्या यह थी कि थोड़ी देर पहले कैमरा चला देते तो सूरज इतना ऊपर था कि आता ही नहीं. वैसे आपकी सलाह आगे से ध्यान रखी जायेगी.

    टिप्पणी द्वारा अमित — अप्रैल 24, 2007 @ 11:14 पूर्वाह्न | प्रतिक्रिया

  9. waah ! ati sundar

    टिप्पणी द्वारा मनीष — मई 1, 2007 @ 7:15 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  10. बहुत ही सुन्दर ! मैने तो फ़ौरन ही इसे desktop background मे डाल दिया.

    टिप्पणी द्वारा DR PRABHAT TANDON — जून 1, 2007 @ 8:38 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  11. बहुत सुंदर!

    टिप्पणी द्वारा सिंधु श्रीधरन — जून 23, 2007 @ 8:34 पूर्वाह्न | प्रतिक्रिया

  12. duniya ki sab se khubshurat dharati jaha bhagawan bhi niwas karte hain kumbh mahine me lag ta aap kahi swarg me ho

    टिप्पणी द्वारा arun mishra — जुलाई 3, 2008 @ 9:18 पूर्वाह्न | प्रतिक्रिया


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