पिटारा भानुमती का

जून 23, 2007

बूढ़े बाबा, सुनीता जी और भारत रत्न

Filed under: अश्रेणीबद्ध — अमित @ 4:22 अपराह्न

भारत भूमि पर रत्नों की कमी नहीं है. न जाने कितने अनमोल रत्न हर गाँव, हर गली में मिल जाते हैं अनायास ही, और हमारे-आपके बीच ही! वे कभी गाँव की कन्या पाठशाला की मास्टरनीजी के रूप में मिलते हैं, जिन्होंने न जाने कितने जीवनों को एक नई दिशा दी, कभी चिलचिलाती धूप में खेतों पर काम करते किसान के रूप में, तो कभी कड़ाके की सर्दी में सीमाओं की रक्षा करते हुए उस नवयुवक के रूप में जिसने अपना सारा जीवन देश के नाम लिख दिया है. धन्य है माँ भारती ऐसे रत्न पाकर! यदि भारत सरकार ऐसे सभी रत्नों को “भारत रत्न” से अलंकृत न कर सके तो भी वे भारतवासियों के हृदय में सदैव जड़े रहेंगे.

मुझे भी ऐसे रत्नों के दर्शन अक्सर होते रहे हैं, उनमें से एक हैं ये बूढ़े बाबा जिनको शायद आपने भी देखा होगा.

बरसों के अनुभव से पके हुये इस चेहरे पर भारतवासी होने का गर्व स्पष्ट झलकता है. ये बूढ़े बाबा उन सभी भारत रत्नों के प्रतिनिधि हैं जिनका मेरे हृदय में विशेष स्थान है और जिनके अनकहे, अनलिखे जीवन-दर्शन के कारण इस भूखण्ड की मिट्टी की गंध पहचानने लायक बन सका हूँ मैं!

आज एक चिट्ठे पर अंतरिक्ष का चक्कर लगाकर आने वाली सुनीता विलियम्स जी को “भारत रत्न” देने की हिमायत की गई. भारत सरकार किसे सम्मानित करे, किसे नहीं – यह मेरे लिये गौण प्रश्न है. जिस दिन देश की सभी आँखें इन बूढ़े बाबा जैसे अनेक रत्नों की परख कर पाने में सक्षम होंगी उस दिन किसे भारत रत्न मिलना चाहिये और किसे नहीं – ऐसे प्रश्न निरर्थक हो जायेंगे और देश एक नई राह पर चल पड़ेगा. उस दिन की प्रतीक्षा है मुझे!

(यदि आप ऊपर की तस्वीर वाले बाबा को ना पहचान पा रहे हों तो यहाँ जाकर उनसे परिचित हो लीजिये).

8 टिप्पणियाँ »

  1. बिल्कुल सही कहा!!

    टिप्पणी द्वारा समीर लाल — जून 23, 2007 @ 5:38 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  2. ब्लोगिन्ग की दुनिया में एक ऐसा ब्लोग जिसे इस बूढे बाबा की तरह सैलयूट करने को मन चाहे …

    महज़ अपनी प्रशंसा की अभिलाषा में एवम् अपने गुण गान पढ़ने की चाह में लिखे गए ब्लोगों की भीड़ से अलग हट कर, किसी भी विवाद में ना घसीटे जा सकने वाली कड़वी सच्चाई को खूबसूरत ढंग से अभिव्यक्त करने पर हार्दिक बधाई|

    अतीत में आपके द्वारा अभिव्यक्त विचारों से वाकिफ नहीं हूँ, लेकिन भविष्य में आपके लेखन को वैसी ही विचारधारा से ओतप्रोत रहने की कामना करता हूँ, जैसी मुझे इस लेख से महसूस हुई|

    (सच्चाई ये है कि इस क्लिप्पिंग को ना जाने पहले कितनी बार टी वी पर देखा था, शायद आख़िरी बार ५/६ साल पहले, लेकिन इस तस्वीर वाले बाबा को ना पहचान सका | तो यहाँ आकर, क्‍िलप्‍पिगं देख कर अपनी यादाश्त को ताज़ा किया और आपको बधाई देने के बहाने किसी भी ब्लोग पर अपनी पहली टिप्पणी लिख डाली| )

    बिना किसी विवाद में जाते हुए, बस यूं ही लिख रहा हूँ, कि :-

    साकी की नवाजिश उन पर है,
    पीने का सलीका जिन को नहीं!
    दस्‍तूर अगर ये कायम रहा,
    आबाद ना होगा मयखाना!

    टिप्पणी द्वारा ?!?!?!?!?! — जून 23, 2007 @ 8:32 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  3. a

    टिप्पणी द्वारा ?!?!?!?!?! — जून 23, 2007 @ 8:35 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  4. शानदार!!!!!!!!!!!!!!!!
    दिल खुश कर दिया आपने यह क्लिपिंग दिखाकर।
    आपके लिखे एक एक शब्द से सहमत हूं!!

    टिप्पणी द्वारा Sanjeet Tripathi — जून 23, 2007 @ 11:51 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  5. .

    टिप्पणी द्वारा abc_xyz — जून 24, 2007 @ 12:54 पूर्वाह्न | प्रतिक्रिया

  6. शानदार लेख । बधाई।

    टिप्पणी द्वारा Rajesh Roshan — जून 24, 2007 @ 6:59 पूर्वाह्न | प्रतिक्रिया

  7. प्रोत्साहन के लिये आप सबका धन्यवाद. “?!?!?!?!?!” जी, आपने अपनी पहली टिप्पणी मेरे चिट्ठे पर की, यह मेरे लिये संतोष की बात है. आप यदि अपना परिचय भी देते तो अच्छा लगता. आपकी आशा के अनुरूप भविष्य में लिख सकूं ऐसा प्रयास रहेगा.

    संजीत भाई, राजेश जी, समीर जी, आपका भी टिप्पणियों के लिये शुक्रिया.

    टिप्पणी द्वारा अमित — जून 26, 2007 @ 6:11 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  8. एक साधारण से दिखते व्यक्ति के लिये असाधारण सम्मान देने वाले व्यक्ति को मेरा salute.

    टिप्पणी द्वारा kanchan chouhan — जून 27, 2007 @ 1:51 अपराह्न | प्रतिक्रिया


RSS feed for comments on this post. TrackBack URI

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

वर्डप्रेस (WordPress.com) पर एक स्वतंत्र वेबसाइट या ब्लॉग बनाएँ .

%d bloggers like this: